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Tuesday, 21 May 2024

सफ़र

जिन्हें सफ़र पे जाना होता है! 

हमसफ़र की जरूरत भी होती है,

जरूरी साजो-सामान की भी, और

बेहतर तबीयत की, सेहत की भी,

एक हद तक तो ज़रूरत होती है,

इरादों, हौसलों की, हिम्मत की, 

ताकत की, मंजिल की, रास्ते की भी,

ज़ुनून, जोश की भी ज़रूरत होती है। 

साथ देगा कोई कहाँ तक कितना,

कोई खुद भी, और दूसरों को भी,

जानने की, और समझने की भी, 

मुसाफ़िर को ज़रूरत होती है! 

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Saturday, 19 November 2022

श्रद्धा अजन्मा!

श्रद्धा !!

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वह अजा,

वह अमरता, 

मनु की सहधर्मिणी, 

श्रद्धा अजन्मा,

निराकार हृदय में, 

साकार, वही सर्वत्र,

मनु के हृदय में, 

प्रकृतिरूपा सतत चंचल,

भावनारूपा निष्ठा अचला।

कर्म-रूपा, काम-रूपा,

सृष्टि-रूपा, नाम-रूपा।

वही हो गई विखंडित,

ज्ञान-रूपा, कर्म-रूपा।

मनुज में वह वृत्ति-रूपा,

अस्मिता वह बुद्धि-रूपा।

बुद्धि-रूपा, कर्म-रूपा,

काम-रूपा, धर्म-रूपा, 

कामाख्या, छिन्नमस्ता,

अपने ही चार रूप,

काटकर निज मस्तक, 

पाँचो मुखों की रक्त-पिपासा

को वह शान्त करती!

श्रद्धा वह नित्य अमर,

जन्म-मृत्यु रहित जीवन!

--

कविता / उज्जैन -१९-११-२०२२,



 





अजा एका लोहितकृष्णशुक्ला ... हि सा।। 

ज्ञाज्ञौ द्वावजावीशनीशावजा ह्येका भोक्तृभोगार्थयुक्ता।

अनन्तश्चात्मा विश्वरूपो ह्यकर्ता त्रयं यदा विन्दते ब्रह्ममेतत्।।

(श्वेताश्वतरोपनिषद्)


Friday, 11 November 2022

नींद : एक कविता

यह जो है नींद;

क्या है! 

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हमारी पूरी ज़िन्दगी का शायद एक तिहाई समय तो नींद में बीत जाता होगा, फिर भी हम तो क्या बड़े बड़े साइन्टिस्ट तक अभी तक इसे ठीक से नहीं जान पाए होंगे, कि यह नींद है क्या! यद्यपि पातञ्जल योगदर्शन में निद्रा को वृत्ति कहा गया है किन्तु निद्रा के स्वरूप को इस प्रकार से परिभाषित किया गया है --

अभाव-प्रत्यययालम्बना वृत्तिर्निद्रा।।१०।।

(समाधिपाद)

यद्यपि निद्रा को माण्डूक्य उपनिषद् में जिस तरह से परिभाषित किया गया है वह भी दृष्टव्य है --

यत्र सुप्तो न कञ्चन कामं कामयते न कञ्चन स्वप्नं पश्यति तत्सुषुप्तम्। सुषुप्त स्थान एकीभूतः प्रज्ञानघन एवानन्दमयो ह्यानन्दभुक्चेतोमुखः प्राज्ञस्तृतीयः पादः।।५।।

तात्पर्य यह कि मन अर्थात् चेतना (consciousnesses) / ध्यान (attention) जहाँ न तो किसी कामना से संलग्न होती है न किसी स्वप्न को देखती है वह मन की सुषुप्त अवस्था है।  यह सामान्य मनुष्य की सुषुप्ति का वर्णन हुआ। 

श्रीमद्भगवद्गीता में एक ही श्लोक में, सुषुप्ति का वर्णन दो रूपों में किया गया है --

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।।

यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनिः।।६९।।

(अध्याय २)

यह भी कहा जा सकता है कि उपरोक्त श्लोक में निद्रा का तो नहीं, जागृति के ही दो प्रकारों का वर्णन किया गया है!




Sunday, 26 June 2022

कुछ नया!

कविता / 26-06-2022

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कुछ नया अगर, नहीं हुआ तो क्या होगा,

पुराना जो था, वही, वाकया बयाँ होगा!

तो वो तारीख़ों का ही हेरफेर होगा बस,

रिवाजों का, रस्मों का मर्सिया होगा!

पेशकश पहल, आप भी तो जरा कीजिए,

आपके ही करने से कुछ, शर्तिया होगा! 

जो मैं नहीं हूँ, तो मुझको ऐसा लगता है,

कौन था वो, जो मेरी जगह जिया होगा!

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OF BELIEFS.

Rational, Irrational, Inherent and Acquired. पिछले दिनों में  blogger  में अपने सभी खास खास ब्लॉगपोस्ट में विदा कह चुका हूँ, लेकिन लगता है इ...